बुधवार, 16 अक्तूबर 2019

यातायात नियमों के पालन से दुर्घटना से बचाव संभव- पुलिस अधीक्षक........

दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद कैसे की जाए डेमो के माध्यम से दी गई जानकारी

यातायात के संकेतों का डेमो के जरिए छात्र-छात्राओं को किया गया जागरूक

छात्र-छात्राओं के डाईविंग लायसेंस बनाने जल्द महाविद्यालय में लगेगी कैम्प


सूरजपुर। रोड सेफ्टी टाईम फार एक्शन, यातायात नियमों के प्रति जागरूकता, सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता किसी प्रकार की जाए एवं सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से बुधवार 16 अक्टूबर को रेवती रमण मिश्र महाविद्यालय सूरजपुर में यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में यातायात पुलिस एवं 108 की टीम ने दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद् किस प्रकार की जाए उसका डेमो देकर छात्र-छात्राओं को जागरूक किया।

कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक सूरजपुर श्री राजेश कुकरेजा ने महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि सड़क पर सावधानी बरतनी अत्यन्त आवश्यक है, सावधानी बरनते में चूक होने पर व्यक्ति की दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को कहा कि दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का उपयोग करें, फोर व्हीलर के इस्तेमाल पर सीट बेल्ट अवश्य लगाए, वाहन चलाते समय मोबाईल का उपयोग कतई न करे, ओव्हर स्पीड वाहन न चलाने की समझाईश दी। महाविद्यालय आने-जाने के दौरान सड़क पर विशेष सतर्कता बरतने हेतु कहा। इस अवसर पर एसपी श्री कुकरेजा ने दुर्घटना से देर भली के संदर्भ में कहा कि सफर के दौरान यदि डाईवर ओव्हर स्पीड वाहन चलाता है तो उसे ऐसा करने से मना करें। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करने पर जोर देते हुए कहा कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को प्रारंभिक उपचार की सख्त जरूरत होती है पुलिस व 108 को तत्काल सूचित करें यथा संभव उसे नजदीक के अस्पताल में जल्द से जल्द ले जाए। सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की मदद् करने वालों को सम्मानित किया जाएगा।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर ने सूरजपुर जिले के पिछले 3 वर्षो तथा इस वर्ष अब तक हुए सड़क हादसे के आंकडों से छात्र-छात्राओं का अवगत कराते हुए कहा कि यातायात नियमों का पालन अवश्य करें, सुरक्षित वाहन चलाए एवं सड़क क्रास करने के पूर्व बरते जाने वाले सावधानियों की जानकारी दी ताकि सड़क दुर्घटनाओं से बची जा सके। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों की अनरेखी से हादसे होते है। वाहन चलाने वाले व्यक्ति के पास वैध डाईविंग लायसेंस होनी चाहिए, 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले जिन छात्र-छात्राओं के पास डाईविंग लायसेंस नहीं थे उन्हें जल्द लायसेंस बनवाने हेतु कहा।
जिला परिवहन अधिकारी अतुल असैय्या ने छात्र-छात्राओं को सड़क पर लगाए जाने वाले ग्लो साईन बोर्ड, वारनिंग तथा अन्य यातायात के संकेतों के बारे में बताया। डाईविंग लायसेंस बनवाने की प्रक्रिया से छात्र-छात्राओं को अवगत कराते हुए कहा कि जिन छात्रों के पास डाईविंग लायसेंस नहीं है वे जल्द लायसेंस हेतु अप्लाई करें।
जागरूकता कार्यक्रम को महाविद्यालय के उप प्राचार्य एच.एन.दुबे ने संबोधित करते हुए कहा कि छात्र-छात्रओं को यातायात नियमों का पालन करने तथा इस जागरूकता कार्यक्रम से प्राप्त जानकारियों को अपने परिजनों तक पहुंचाकर उन्हें भी जागरूक करें।

डेमो के जरिए दी गई दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद कैसे की जाए

यातायात प्रभारी आर.सी.राय व 108 की टीम ने महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद कैसे करनी है, उन्हें प्राथमिक उपचार कैसे दी जाए, घायल व्यक्ति के मुंह में मिट्टी पत्थर की सफाई करने का तरीका, घायल व्यक्ति के चोट से खून रोकने की प्रक्रिया, मुंह से श्वास देने की विधि, सावधानी पूर्वक घायल व्यक्ति को स्टेचर में कैसे रखी जाए इन सभी का डेमो के माध्यम से जानकारी दी गई।

महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के डाईविंग लायसेंस बनाने लगेगी कैम्प

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री राजेश कुकरेजा ने महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं से पूछा कि कितनों के पास डाईविंग लायसेंस है जिस पर कम ही छात्र-छात्राओं के पास लायसेंस होने की जानकारी हुई। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के द्वारा डाईविंग लायसेंस बनवाने हेतु महाविद्यालय में कैम्प लगाने का अनुरोध किए जाने पर पुलिस अधीक्षक श्री कुकरेजा ने महाविद्यालय में कैम्प लगाने हेतु कहा आरटीओ अधिकारी को कहा जिस पर जिला परिवहन अधिकारी अतुल असैय्या ने जल्द ही महाविद्यालय में कैम्प लगाए जाने की जानकारी दी।


मंच का संचालन शिक्षक चन्द्रभूषण मिश्रा के द्वारा किया गया। इस दौरान यातायात अमला, 108 की पूरी टीम एवं महाविद्यालय के करीब 600 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

'सायबर की पाठशाला' : सायबर जागरूकता अभियान कड़ी-3

'सायबर की पाठशाला' : सायबर जागरूकता अभियान कड़ी-3
सायबर की पाठशाला में आज तीसरे पाठ में हम समझने की कोशिश कर रहे हैं कि एक सुरक्षित लिंक कैसा दिखता या होता है। धोखेबाज/अपराधी आम लोगों को ठगने के लिए बैंको के नाम से मिलते जुलते नाम या अक्षरों का प्रयोग करके एक यूआरएल/URL बनाता है और उसे मोबाइल पर सीधे मैसेज के रूप में भेजता है इन लिंकनुमा URL पर क्लिक करते ही आप ठगी के शिकार हो जाते हैं। यदि लिंक में anydesk, mingle, teamviewer जैसे शब्द हैं तो आपके फोन को हैक करने का प्रयास हो रहा है, तुरंत मैसेज डिलिट करें। लिंक पर क्लिक बिलकुल न करें। अनजान व्यक्तियों से फोन पर ज्यादा बात न करें और न ही उन्हें किसी भी तरह की जानकारी दें चाहे कुछ भी हो जाए। तभी आप ठगी से बच पाएंगे। इस तरह के फर्जीवाड़ों पर और विस्तार से जानकारी के लिए इस श्रृंखला पर नजर बनाए रखें। पिछले पाठों को फिर से जानने के लिए/ पुनरावलोकन के लिए तस्वीर पर क्लिक करें या ऊपर के संबंधित टैब (सायबर की पाठशाला) पर क्लिक करें।