शुक्रवार, 6 जनवरी 2023

सूरजपुर में साढे पांच साल का नन्हा सिपाही, पिता की मृत्यु के बाद पुलिस विभाग में दी गई बाल आरक्षक की नौकरी

  • आईजी सरगुजा ने पुलिस अधीक्षक को अनुकम्पा नियुक्त की प्रक्रिया जल्द पूर्ण करने दिए थे निर्देश।
  • पुलिस अधीक्षक ने नए वर्ष में बच्चे को दी अनुकम्पा नियुक्ति की सौगात।

सूरजपुर। जिले की पुलिस विभाग में महज साढे पांच वर्ष के बच्चे को नियुक्ति दी गई है। बाल आरक्षक के रुप में भर्ती किए गए बच्चे के पिता की असामयिक निधन के बाद उसे अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। अपनी मां के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे बच्चे को पुलिस अधीक्षक सूरजपुर श्री रामकृष्ण साहू (भा.पु.से.) ने नए वर्ष पर सौगात देते हुए नियुक्ति का आदेश प्रदाय किया। पुलिस अधीक्षक ने नियुक्ति आदेश के साथ बच्चों की पसंदीदा चॉकलेट भी प्रदाय किया। पुलिस अधीक्षक सूरजपुर श्री रामकृष्ण साहू ने बताया कि हरेन्द्र सिंह पैंकरा को बाल आरक्षक के पद पर नियुक्ति दी गई है। इनके पिता हरि प्रसाद पैंकरा उप निरीक्षक (अ) के पद पर जिला कोरिया में पदस्थ थे। नौकरी के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर आईजी सरगुजा रेंज श्री रामगोपाल गर्ग (भा.पु.से.) के द्वारा अनुकम्पा नियुक्त के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अनुकम्पा नियुक्ति संबंधी सभी कार्रवाई जल्द पूरी करते हुए अनुकम्पा नियुक्ति दिए जाने के निर्देश दिए थे। शुक्रवार को सभी प्रक्रिया पूर्ण होने पर हरेन्द्र सिंह पैंकरा को पुलिस विभाग में बाल आरक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर आरक्षक के पद पर पदस्थ किया जाएगा। इस दौरान स्टेनो अखिलेश सिंह, दशरथ पैंकरा, स्थापना प्रभारी पंकज नेमा,  निरीक्षक धर्मानंद शुक्ला, एसआई नीलाम्बर मिश्रा मौजूद रहे।

'सायबर की पाठशाला' : सायबर जागरूकता अभियान कड़ी-3

'सायबर की पाठशाला' : सायबर जागरूकता अभियान कड़ी-3
सायबर की पाठशाला में आज तीसरे पाठ में हम समझने की कोशिश कर रहे हैं कि एक सुरक्षित लिंक कैसा दिखता या होता है। धोखेबाज/अपराधी आम लोगों को ठगने के लिए बैंको के नाम से मिलते जुलते नाम या अक्षरों का प्रयोग करके एक यूआरएल/URL बनाता है और उसे मोबाइल पर सीधे मैसेज के रूप में भेजता है इन लिंकनुमा URL पर क्लिक करते ही आप ठगी के शिकार हो जाते हैं। यदि लिंक में anydesk, mingle, teamviewer जैसे शब्द हैं तो आपके फोन को हैक करने का प्रयास हो रहा है, तुरंत मैसेज डिलिट करें। लिंक पर क्लिक बिलकुल न करें। अनजान से व्यक्तियों से फोन पर ज्यादा बात न करें और न ही उन्हें किसी भी तरह की जानकारी दें चाहे कुछ भी हो जाए। तभी आप ठगी से बच पाएंगे। इस तरह के फर्जीवाड़ों पर और विस्तार से जानकारी के लिए इस श्रृंखला पर नजर बनाए रखें। पिछले पाठों को फिर से जानने के लिए/ पुनरावलोकन के लिए तस्वीर पर क्लिक करें या ऊपर के संबंधित टैब (सायबर की पाठशाला) पर क्लिक करें।