सूरजपुर। सायबर अपराध से नागरिकों को बचाने, सोशल मीडिया का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल, ऑनलाईन ठगी का शिकार नागरिक न हो उन्हें सायबर अपराध की जानकारी व इससे बचने के उपाए से अवगत कराने के लिए पुलिस अधीक्षक श्री राजेश अग्रवाल ने एक विशेष मुहिम चलाया है जिसका नाम सायबर की पाठशाला है। इस मुहिम के तहत सायबर सेल की टीम व जिले की पुलिस नागरिकों को सायबर से संबंधित विषयों पर जागरूक करने में लगा हुआ है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर के मार्गदर्शन में बीते दिन सायबर पाठशाला-2 का जागरूकता पोस्टर जारी किया गया जिसमें फर्जी ई-मेल से किए जाने वाले ठगी के बारे में बताया गया है। इसमें ठग/अपराधी पीड़ित को एक बहुत बड़ी अविश्वसनीय रकम की लाटरी लगने, बहुत अधिक मुनाफे का लालच दिखाकर पैसे निवेश कराने, सस्ते ब्याज या 0 प्रतिशत ब्याज पर लोन का वादा करके या ट्रेक्टर या अन्य कोई एजेंसी कम कमीशन पर दिलाने के नाम पर ठगी की शुरूआत करता है और पीड़ित की बैंक खाते की जानकारी उसी से लेकर या धोखेबाज सीधे अपने ही बैंक या वैलेट अकाउंट में रुपये ट्रांसफर करवा लेता है। इस प्रकार के फर्जीवाड़े से नागरिकों को बचाने सूरजपुर पुलिस के द्वारा प्रभावी कद उठाते हुए लगातार साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूता संदेश तथा पोस्टर जारी किया जायेगा।
'सायबर की पाठशाला' : सायबर जागरूकता अभियान कड़ी-3
सायबर की पाठशाला में आज तीसरे पाठ में हम समझने की कोशिश कर रहे हैं कि एक सुरक्षित लिंक कैसा दिखता या होता है। धोखेबाज/अपराधी आम लोगों को ठगने के लिए बैंको के नाम से मिलते जुलते नाम या अक्षरों का प्रयोग करके एक यूआरएल/URL बनाता है और उसे मोबाइल पर सीधे मैसेज के रूप में भेजता है इन लिंकनुमा URL पर क्लिक करते ही आप ठगी के शिकार हो जाते हैं। यदि लिंक में anydesk, mingle, teamviewer जैसे शब्द हैं तो आपके फोन को हैक करने का प्रयास हो रहा है, तुरंत मैसेज डिलिट करें। लिंक पर क्लिक बिलकुल न करें। अनजान व्यक्तियों से फोन पर ज्यादा बात न करें और न ही उन्हें किसी भी तरह की जानकारी दें चाहे कुछ भी हो जाए। तभी आप ठगी से बच पाएंगे। इस तरह के फर्जीवाड़ों पर और विस्तार से जानकारी के लिए इस श्रृंखला पर नजर बनाए रखें। पिछले पाठों को फिर से जानने के लिए/ पुनरावलोकन के लिए तस्वीर पर क्लिक करें या ऊपर के संबंधित टैब (सायबर की पाठशाला) पर क्लिक करें।