सोमवार, 18 नवंबर 2024

एसएसपी श्री प्रशांत कुमार ठाकुर की मुहिम। विश्वसनीयता बढ़ाने का प्रयास, लोगों से दूरी घटाने के लिए विजुअल पुलिसिंग शुरू।

 

सूरजपुर। जिले में अब पुलिस को विजुअल बनाने के लिए विजुअल पेट्रोलिंग की जा रही है, जिसके माध्यम से पुलिस अब लोगों को दिख रही है। अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए अब पुलिस ने विजुअल पेट्रोलिंग शुरू की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सूरजपुर श्री प्रशांत कुमार ठाकुर ने जिले में पुलिस को विजुअल बनाने तथा लोगों का पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए विजुअल पेट्रोलिंग करने आदेश दिया है, जिसके परिपालन में जिले के थाना प्रभारी अपने दल बल के साथ थाना क्षेत्रों में पैदल पेट्रोलिंग कर जनता के बीच जाकर समस्या को सुन और समझाकर निराकरण के उपाय कर रही है।
           विजुअल पेट्रोलिंग को और पुख्ता करने के लिए सीएसपी और एसडीओपी को भी नियमित रूप से विजुअल पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए गए है। एसएसपी सूरजपुर श्री प्रशांत कुमार ठाकुर ने बताया कि विजुअल पुलिसिंग करने का मकसद अपराधों पर नियंत्रण असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई तथा जनता को पुलिस की मौजूदगी का एहसास दिलाना। साथ ही असामाजिक तत्वों पर पुलिस का भय उत्पन्न करना है।

मुख्य-मुख्य स्थानों पर दिख रही पुलिस। विजुअल पुलिसिंग के अंतर्गत जिले के थानों के थाना प्रभारी अपने समयानुसार अपने अपने क्षेत्रों में विजुअल पेट्रोलिंग कर रहे है। इस दौरान पुलिस की टीम अपने अपने थाना क्षेत्रों के मुख्य-मुख्य स्थानों में कम से कम 10 से 15 मिनट तक खड़े होकर लोगों से भी मिलकर चर्चा कर रही है। पुलिस के ऐसा करने से अब लोगों में पुलिस के प्रति भी विश्वास बढ़ रहा है साथ ही पुलिस का सूचना तंत्र भी मजबूत हो रहा है।

होटल लॉज ढाबों की हो रही चेकिंग। जिले के सभी थाना के प्रभारी शहर में जिस समय में ज्यादा भीड़ भाड़ होती है। उस समय में विजुअल पेट्रोलिंग कर रही है। वहीं इस पेट्रोलिंग के साथ साथ पुलिस की टीम होटल ढाबों, लॉज की चेकिंग करने के साथ शहर में स्थित जेवर दुकानों पर भी अपनी नजर रख रही है। साथ ही पुलिस की टीम शहर के मुख्य मार्गाे सहित सकरी गली में भी पंहुच कर विजुअल पेट्रोलिंग कर रही है ताकि लोगों के सामने पुलिस दिखाई देती रहे।

'सायबर की पाठशाला' : सायबर जागरूकता अभियान कड़ी-3

'सायबर की पाठशाला' : सायबर जागरूकता अभियान कड़ी-3
सायबर की पाठशाला में आज तीसरे पाठ में हम समझने की कोशिश कर रहे हैं कि एक सुरक्षित लिंक कैसा दिखता या होता है। धोखेबाज/अपराधी आम लोगों को ठगने के लिए बैंको के नाम से मिलते जुलते नाम या अक्षरों का प्रयोग करके एक यूआरएल/URL बनाता है और उसे मोबाइल पर सीधे मैसेज के रूप में भेजता है इन लिंकनुमा URL पर क्लिक करते ही आप ठगी के शिकार हो जाते हैं। यदि लिंक में anydesk, mingle, teamviewer जैसे शब्द हैं तो आपके फोन को हैक करने का प्रयास हो रहा है, तुरंत मैसेज डिलिट करें। लिंक पर क्लिक बिलकुल न करें। अनजान व्यक्तियों से फोन पर ज्यादा बात न करें और न ही उन्हें किसी भी तरह की जानकारी दें चाहे कुछ भी हो जाए। तभी आप ठगी से बच पाएंगे। इस तरह के फर्जीवाड़ों पर और विस्तार से जानकारी के लिए इस श्रृंखला पर नजर बनाए रखें। पिछले पाठों को फिर से जानने के लिए/ पुनरावलोकन के लिए तस्वीर पर क्लिक करें या ऊपर के संबंधित टैब (सायबर की पाठशाला) पर क्लिक करें।