सूरजपुर। पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज श्री रामगोपाल गर्ग के सतत मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक सूरजपुर श्री आई कल्याण एलिसेला के द्वारा अवैध कारोबार करने वालों लोगों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करते हुए जेल की सलाखो के पीछे भेजने तथा क्षेत्र में सूचना तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश थाना-चौकी प्रभारियों को दिए है। जिसके बाद से ही अवैध कारोबार करने वालों पर पुलिस लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई करने में जुटी हुई है। इसी क्रम में दिनांक 23.07.2023 को थाना भटगांव पुलिस को मुखबीर से सूचना मिला कि एक स्कूटी में 2 व्यक्ति नशीली दवाई लेकर बिक्री करने के लिए चंदौरा होेते हुए जरही की ओर जा रहे है। सूचना पर त्वरित कार्यवाही करते हुए थाना भटगांव की पुलिस टीम ने ग्राम जरही में घेराबंदी कर स्कूटी सहित अंजनी कुशवाहा पिता रामकिशुन कुशवाहा उम्र 28 वर्ष निवासी कटनेशा, थाना बसंतपुर, जिला बलरामपुर एवं राहुल शर्मा पिता साधुसरन शर्मा उम्र 29 वर्ष ग्राम जरही, थाना भटगांव को पकड़ा जिनके कब्जे से एविल इंजेक्शन 239 नग, नशीली टेबलेट 1800 नग, ब्रूफॉन इंजेक्शन 218 नग व रेक्सोजेसिक इंजेक्शन 20 नग जप्त किया गया जिसकी बाजारू कीमत करीब 2 लाख 50 हजार रूपये है। मामले में नशीली दवाईयां व घटना में प्रयुक्त स्कूटी वाहन जप्त कर धारा 21(बी) एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्यवाही कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्यवाही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शोभराज अग्रवाल व एसडीओपी प्रतापपुर अमोलक सिंह के मार्गदर्शन में हुई जिसमें थाना प्रभारी भटगांव फर्दीनंद कुजूर, एसआई सरफराज फिरदौसी, नवलकिशोर दुबे, एएसआई सुमंत पाण्डेय, संतोष सिंह, गुरू प्रसाद यादव, प्रधान आरक्षक पूरनचंद राजवाड़े, आरक्षक कमलेश्वर सिंह व विजय गुप्ता सक्रिय रहे।
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'सायबर की पाठशाला' : सायबर जागरूकता अभियान कड़ी-3
सायबर की पाठशाला में आज तीसरे पाठ में हम समझने की कोशिश कर रहे हैं कि एक सुरक्षित लिंक कैसा दिखता या होता है। धोखेबाज/अपराधी आम लोगों को ठगने के लिए बैंको के नाम से मिलते जुलते नाम या अक्षरों का प्रयोग करके एक यूआरएल/URL बनाता है और उसे मोबाइल पर सीधे मैसेज के रूप में भेजता है इन लिंकनुमा URL पर क्लिक करते ही आप ठगी के शिकार हो जाते हैं। यदि लिंक में anydesk, mingle, teamviewer जैसे शब्द हैं तो आपके फोन को हैक करने का प्रयास हो रहा है, तुरंत मैसेज डिलिट करें। लिंक पर क्लिक बिलकुल न करें। अनजान व्यक्तियों से फोन पर ज्यादा बात न करें और न ही उन्हें किसी भी तरह की जानकारी दें चाहे कुछ भी हो जाए। तभी आप ठगी से बच पाएंगे। इस तरह के फर्जीवाड़ों पर और विस्तार से जानकारी के लिए इस श्रृंखला पर नजर बनाए रखें। पिछले पाठों को फिर से जानने के लिए/ पुनरावलोकन के लिए तस्वीर पर क्लिक करें या ऊपर के संबंधित टैब (सायबर की पाठशाला) पर क्लिक करें।